Plastics se Paise kaise Kamaye hindi me

 

भविष्य का प्लास्टिक 

 ये सामान्य प्लास्टिक की तरह दिखता है और काम भी वही  करता है लेकिन ये बनना है पौधों से ये  पेट्रोल से बने प्लास्टिक से कम प्रदूषण करता है और कुछ मामलों में तो बायोडिग्रेडेबल भी है, लेकिन बात इतनी आसान नहीं है।बायोप्लास्टिक को  बायोडिग्रेडेबल प्लास्टिक के रुप में देखा है   जैसे कॉफी  कैप्सूल यह कटलरी लेकिन सारे बायोप्लास्टिक  बायोडिग्रेडेबल प्लास्टिक नही है बायोप्लास्टिक का मतलब है बायोवेस्ट है यानी बायोमास से बने  जैसे गन्ना ,आलू या फिर साबूदाना। 

 कोको कोला और दनोज जैसी बड़ी कंपनियों ने बायोवेस्ट बोतलों का इस्तेमाल भी शुरू कर दिया है। दोनों का कार्य एक ही जैसा होता है फिलहाल कुल प्लास्टिक का सिर्फ 1% बायोप्लास्टिक है, लेकिन बाजार बढ़ रहा है। दुनिया में।  बायोप्लास्टिक निर्माता कंपनियों की बढ़ोतरी हो रही है

 

 बायोप्लास्टिक उत्पादन में ग्रीन हाउस गैसें कम निकलती है। इको फ्रेंडली विकल्प बन गए। प्लास्टिक बनाने का विचार नया नहीं है। जब से शुरुआती मानव निर्मित प्लास्टिक पार्क साइन नाम की  बायो प्लास्टिक की था। उसे आज से नाइट कहते हैं। यह पौधों के सलेलू से बना है। फोड़ने 21 सोयाबीन कार भी निकाली थी। अंदाजा लगाइए सोयाबीन वाले बायोप्लास्टिक से, लेकिन आखिरकार पेट्रोल आधारित प्लास्टिक ही चलते उत्पादन में आसान और ज्यादा कारगर और उनकी मांग बढ़ती जा रही है। फिर भी बायोप्लास्टिक अब वापसी कर रहे हैं और आने वाले सालों में उत्पादन वृद्धि होगी।


बायोप्लास्टिक से जुडी कमी


 प्लास्टिक बायो आधारित होने का मतलब यह नहीं है कि वह आखिरकार मिट्टी में मिल जाएगा। 

 सामग्रियों की केमिस्ट्री से बायोडिग्रेडेबिलिटी आती है।अक्षय स्रोतों से आप ऐसी सामग्री बना सकते हैं जो बायोडिग्रेड  या नहीं  ।ऐसी सामग्री फॉसिल बेस्ट प्लास्टिक की तरह होती हैं।  गैर बायोडिग्रेडेबल प्लास्टिक की बात करें। एक आम व्याख्या तो यही है कि यह पेट्रोल से निकाला एथिलीन है जो एक लंबी कड़ी के रूप में पॉलीएथिलीन यानी बन जाता है और टिकाऊ आधारित सामग्री। 

यह पेट्रोल वाली प्लास्टिक की तरह काम करता है और उनकी तरह महासागरों को अवरुद्ध कर सकता है और समुद्री जीवो के भीतर पहुंच  सकता है। सच्चाई यह है कि आज करीब  45% बायोप्लास्टिक बायोडिग्रेडेबल प्लास्टिक पॉलीलैक्टिक ऐसे दूसरे बायोडिग्रेडेबल प्लास्टिक की तरह यह पूरी तरह से  CO2और पानी में डिग्रेड हो सकता है। इसका मतलब निश्चित समय और निश्चित परिस्थिति में बायोडीजल हो सकता है। कि कंपोस्ट प्लांट में 3 महीने निकट आकर कंपोस्टिंग में भेजना होता है। तभी वह डिग्रेड हो सकता है। अगर आप इकट्ठा ना करते है  यह सोचे कि बाहर फेंक देते हैं तो फेकने से न ही ये सड़ेगा और कौशल वाले प्लास्टिक की दशा की कंपोस्टिंग फैसिलिटी बहुत कम है।फसल वाले प्लास्टिक की तरह समस्या पैदा करेगा। जैसे प्रॉब्लम तो कंपोस्ट होने वाला प्लास्टिक लेते भी नहीं है 

क्योंकि पारंपरिक प्लास्टिक से उन्हें अलग करना कठिन है। एक बात और बायो प्लास्टिक के लिए उगाए जाने वाले पौधों को ज्यादा जगह और ज्यादा पानी चाहिए। उनका कार्बन फुटप्रिंट भी बड़ा हो सकता है। और वह फसलों को श्रोताओं से दूर करते हैं और पेस्टिसाइड से पर्यावरण को नुकसान पहुंचाते हैं। कुछ बायोप्लास्टिक कंपनियां लोकल टिकाऊ फसल उगाने लगी है 

उसे बदलने के लिए दुनिया में उगने वाला आधे से ज्यादा मक्का खपत की जाएगा। बेशक यह निराश करने वाली बात करना बेकार कुछ मामलों में कैसे इस्तेमाल करना पेट्रोल बेस्ट प्लास्टिक के मुकाबले बेहतर है। जैसे पहले नंबर पर भोजन संबंधी प्लास्टिक यूज़ के मामले में प्लास्टिक हो सकता है या फिर इस कॉपी कैप्सूल में आमतौर पर फूड पैकेजिंग में। 

पारंपरिक प्लास्टिक को बायोडिग्रेडेबल से बदलना वह भी घर पर ही कंपोस्ट करना अच्छा विकल्प है और खेती में इस्तेमाल की गई फाइल जिसे जमीन में गड़ा जा सकता है 

मछली पकड़ने वाले जाल और को भी बायोडिग्रेडेबल से बदला जा सकता है , लेकिन सभी प्लास्टिक को बायो प्लास्टिक के रूप में कंपोस्ट नही किया जा सकता है। फूड पैकेजिंग को बायोडिग्रेडेब नही कर सकते हैं लेकिन कंपोस्ट कर सकते हैं। उसका 40 फ़ीसदी  पैकेजिंग में इस्तेमाल होता है।बायोप्लास्टिक आम प्लास्टिक से बेहतर हो सकता है। लेकिन हम जितना हो सके प्लास्टिक  प्रयोग कम से कम करना होगा।जिनसे हमारा पर्यावरण दुषित नहीं होगा।

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